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Thursday, 28 September 2017

Hindi Poem: Love without Sex | बिना सेक्स के इश्क़...



कोयल के बिना ये काला कानन,
और बिन कंठों के कोकिला।

सन्ध्या के बिना दिन की सुंदरता,
और बिन गोधूलि शाम सुहानी।

ख़ुदा के बिना ये कायनात,
और बिन आदम के ईश्वर।

मयखाने के बिना ये बस्ती,
और बिन शायर के मय-कदा।

गुलाब के बिना ये बाग पियारा,
और बिन जानम के गुले-गुलाब।

कुछ ऐसे ही है...

प्रेम के बिना ये क्षणिक जीवन,
और बिना सेक्स के इश्क़।

(Author, my tukbandi)
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*Image Source: Pexels

Friday, 4 August 2017

Hindi Poem: वो लड़की जो भागी है अभी...




वो लड़की,
जो भागी है अभी,
हो सकता है
वो भागी नहीं हो,
पहुंची हो कहीं।

-Rajendra Nehra
(Author, my tukbandi)
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*Image: Google.

Friday, 14 July 2017

Love Tukbandi: The Moon of my Erotic Dreams...




With my naked eyes
What I see on the moon
It is we
Wearing only a smile
Wrapped up in one another.

-Rajendra Nehra
(Author, my tukbandi)
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*Image: Pexels.

Thursday, 11 May 2017

My Crazy Kavita: आओ कभी हवेली पर...





धरकर जान हथेली पर,
आओ कभी हवेली पर।

प्रेत बसे यहां काले काले,
लम्बे लम्बे बालों वाले।

डरने की कोई बात नहीं,
दिन है अभी तो, रात नहीं।

रात को होगा माहौल सुहाना,
भूतों का रहेगा आना जाना।

पकड़म पकड़ाई का खेल होगा,
सब निशाचरों से मेल होगा।

सुनसान अंधेरा बोल पड़ेगा,
भींतों से जब सोम झड़ेगा।

भौर तलक मदहोश मिलोगे,
बस अभी बताओ क्या लोगे?

हवेली तो बस बहाना है,
चौधरी साब का ठिकाना है।

तो मित्रों!

धरकर जान हथेली पर,
आओ कभी हवेली पर।

भौंरा बनकर मंडराते जाओ,
चांद जैसी चमेली पर।

इश्क़ फ़रमाओ सीधा सीधा,
नज़र न डालो सहेली पर।

इतना भी मत माथा कुचरो,
उल्टी पुल्टी पहेली पर।

समझ गए तो हंस दो वरना,
आओ कभी हवेली पर।

(Author, my tukbandi)


*Image Source: Pexels

Monday, 3 April 2017

Hindi Poem: विभाजन | The Partition




इस सुनहरे आसमान पर कभी,
बहुत बड़ा एक बादल होता था.

राम जाने कहां से
वो जोरदार बवंडर आया,
और उड़ा ले गया कुछ टुकड़े
अपने साथ.

और वो बूढ़ा बरगद,
ख़ामोश खड़ा देखता रहा बस.

-Rajendra Nehra
(Author, my tukbandi)
www.mytukbandi.in


*Image Source: Pexels.