Monday, 2 April 2018

A Poem for Her: एक लड़की बावली सी...



थोड़ी-थोड़ी उतावली सी,
एक लड़की बावली सी.

जब से मेरी नजर में आई,
दिल के खाली नगर में आई.

मन का उसके रंग है गोरा,
सूरत प्यारी सांवली सी.

जीवन में उन्माद आया,
बड़े दिनों के बाद आया.

अब तो मेरे दिल के घर में,
रहती है बस दीपावली सी.

(Author and Editor, my tukbandi)

Friday, 23 February 2018

Haveli 2.0: Aao Kabhi Haveli Par Dobara | हवेली पर हवन करेंगे...



आओ बंधु फन करेंगे,
हवेली पर हवन करेंगे।

भसड़ मची है मयखानों में,
चलो चलें अब सुनसानों में।

कांकड़ में अपनी कोठी है,
सुरा के साथ में बोटी है।

भूखे प्यासे सब आ जाओ,
ख़ुमार बनकर छा जाओ।

आज करेगा कौन कमाल?
किसके है तीतर का बाल?

शर्माना तो छोड़ ही दो,
आज हदों को तोड़ ही दो।

पीकर कुछ करतब करो,
या फिर जाओ जप करो।

अपनी हवेली, अपनी कोठी,
बात नहीं ये छोटी मोटी।

तो फिर...

आओ बंधु फन करेंगे,
हवेली पर हवन करेंगे।

धूम्रपान वर्जित रहेगा,
मदिरा का सेवन करेंगे।

झूम झूमकर नाचेंगे,
सारी रात भजन करेंगे।

हाला के इस कोलाहल से,
दर्दे दिलों में अमन करेंगे।

बकचोदी के फूल खिलाकर,
इस उजाड़ को चमन करेंगे।

Ssshhh...

चौधरी साब पधार रहे हैं,
सारे लोग नमन करेंगे।


(Author and Editor, my tukbandi)
www.mytukbandi.in



*Image Source: Pixabay

Thursday, 28 September 2017

Hindi Poem: Love without Sex | बिना सेक्स के इश्क़...



कोयल के बिना ये काला कानन,
और बिन कंठों के कोकिला।

सन्ध्या के बिना दिन की सुंदरता,
और बिन गोधूलि शाम सुहानी।

ख़ुदा के बिना ये कायनात,
और बिन आदम के ईश्वर।

मयखाने के बिना ये बस्ती,
और बिन शायर के मय-कदा।

गुलाब के बिना ये बाग पियारा,
और बिन जानम के गुले-गुलाब।

कुछ ऐसे ही है...

प्रेम के बिना ये क्षणिक जीवन,
और बिना सेक्स के इश्क़।

(Author, my tukbandi)
www.mytukbandi.in

*Image Source: Pexels