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Friday, 8 November 2013

Hindi Love Poem: एक मासूम का दिल लेकर बैठा हूँ...



मैं ये कैसा गुनाह कर बैठा हूँ,
एक मासूम का दिल लेकर बैठा हूँ।

वो मासूम चेहरा मुझे अपना सा लगता है,
और उन आँखों में साफ लिखा दिखता है:

"सीसा हूँ बस ये ख़याल रखना साथी,
तेरे हाथ से छूटी तो बिखर जाउंगी।"

अब तो मेरी आंखें...

टूटा तारा तो कभी नया चाँद देखा करती हैं,
और उसे पाने की हर पल दुआ करती हैं।



(Author, my tukbandi)

Sunday, 22 September 2013

Hindi Poem: रिश्ते बड़े नाज़ुक और कच्चे मिले...



रिश्ते बड़े नाज़ुक और कच्चे मिले,
मगर अच्छा हुआ जो अच्छे मिले।

या ईश्वर! ये नफ़रत क्यों है?
जब मोहब्बत के पैगाम अच्छे मिले।

अब सौदा करे भी तो किससे,
कमबख्त दुश्मन भी अच्छे मिले।

सुनते हैं कि जमाना ख़राब है,
मगर आप दोस्त अच्छे मिले।

अब तन्हाई से डरते नहीं राजू!
आँखों में ये मोती अच्छे मिले।



(Author, my tukbandi)

Tuesday, 17 September 2013

Hindi Poem: दिल मेरा खो जाना चाहता है...



दिल मेरा खो जाना चाहता है,
बस तेरा हो जाना चाहता है।

तेरे दिल की जमीन पर,
प्रेम-बीज बो जाना चाहता है।

क्यों आया तू कल ख्वाब में,
पागल आज रो जाना चाहता है।

तू जनता है मैं बुरा नहीं दोस्त!
फिर क्यों दूर हो जाना चाहता है।

सितारे उतर आये हैं आँखों में,
अब आसमान सो जाना चाहता है।


(Author, my tukbandi)

Sunday, 15 September 2013

For My Love | ये लो मेरा दिल रख लो...



मेरी उल्फत! मेरी जान!!

हाथ पकड़कर ले चलो,
कहीं ठोकर ना खा जाऊं,

और हाँ!

ये लो मेरा दिल रख लो,
कहीं खोकर ना आ जाऊं.



(Author, my tukbandi)

Saturday, 14 September 2013

Hindi Poem: गरम मेरे शहर की हवा कुछ नहीं...



गरम मेरे शहर की हवा कुछ नहीं,
आखिर इसे क्यों हुआ कुछ नहीं।

कुछ जानकर ही किसी ने कहा होगा,
हाथ उठे हैं मगर दुआ कुछ नहीं।

मैं तो पत्थर हूँ मुझे क्या होगा,
क्या तुमको भी हुआ कुछ नहीं ?

उसके हाथ की पीकर भी खड़ा हूँ मैं,
कम ये भी तो जलवा कुछ नहीं।

अब क्या बतलाएं इश्क़ में राजू,
सुना है दर्द से बड़ी दवा कुछ नहीं।



(Author, my tukbandi)

Thursday, 5 September 2013

Hindi Love Poem: मेरे दिल की पटरी...



मेरे दिल की पटरी
और
तेरी यादों की ट्रैन,

और फ़िर…

धड़क-धड़क...
धड़क-धड़क...



(Author, my tukbandi)

Wednesday, 4 September 2013

Hindi Poem by Rajendra Nehra: Sham Ke Dhalne Ka Intezar Kar Lete Hain | शाम के ढलने का इंतजार कर लेते हैं...



शाम के ढलने का इंतजार कर लेते हैं,
खुद से भी बातें दो चार कर लेते हैं।

जानते हैं ये ठीक नहीं मगर फिर भी,
गुजरे वक्त को याद कभी-कभार कर लेते हैं।

यूं तो सोचा नहीं करते कभी कुछ करते,
पर कभी बैठते हैं सोच विचार कर लेते हैं।

जाने क्यों जाता है वो हंगामों के बाजार,
हम तो खुद को दर किनार कर लेते हैं।

वो लाया फिजिक्स की किताब और बोला,
आ बैठ राजू! कुछ पाठ तैयार कर लेते हैं।


(Author, my tukbandi)

Tuesday, 27 August 2013

Hindi Poem: दिल पर छाए तेरी यादों के बादल...



कसम से कर देंगे मुझको पागल,
दिल पर छाए तेरी यादों  के बादल।

दिल से निकलकर आँखों में आए,
और फिर रात भर बरसे बादल।

धुल गई स्याही मन के कागज से,
दिल की जमीन हुई दल-दल।

सुबह देखा धुंद छाई थी हर तरफ़,
ये क्या हुआ, कहां गए सब बादल।

मुझसे मिलकर तेरे पास गए होंगे,
चुराया तो होगा तेरी आंख से काजल।



(Author, my tukbandi)

Friday, 16 August 2013

Hindi Poem: अजीब है बातों के बाजार निकले...



अजीब है बातों के बाजार निकले,
कुछ लोग सच के खरीदार निकले।

आपको जानकर जान कहा है,
सितमगर निकले तो एतबार निकले।

दिल में दफ्न  है यादें उसकी,
कमबख्त आँखों में बार बार निकले।

निकला चाँद और हम निकले,
निकले और कई बार निकले।

आपको देने आये थे दिल की दौलत,
अफ़सोस कि आप भी जानकार निकले।



(Author, my tukbandi)

Monday, 12 August 2013

Hindi Poem: समन्दर को चाहे खामोश रहने दो...



समन्दर को चाहे खामोश रहने दो,
मगर मुझे कुछ कहना है कहने दो।

कोई नया रुख दो इन हवाओं को आज,
इन्हें आंधियों की तरह मत बहने दो।

मंजिल है दूर अभी चलना है बहुत,
मेरे पांव को कांटे की चुभन सहने दो।

मोहब्बत फैला दो यहाँ हर तरफ,
किसी आंख में आंसू  मत बहने दो।

चाहे कर दो हर राज़ को बेपर्दा यारों,
मगर इस 'राज़' को राज़ रहने दो।



(Author, my tukbandi)

Tuesday, 6 August 2013

Hindi Poem on Nature: सारी कुदरत का नशेमन है शज़र...



केवल परिंदों का बसेरा नहीं है ये शज़र,
सारी कुदरत का नशेमन है ये शज़र।

तुम दरख्तों को काट रहे हो ऐसा नहीं है,
जल्दी संभलो! खुद पर चला रहे हो खंजर।

सोचो अगर न मिलता माँ का आंचल,
वैसा ही होगा बिन पेड़ों का मंजर।

खेत-खलिहान, नदी-तालब, वन-उपवन,
नहीं होंगे ये नज़ारे जब न होंगे शज़र।

गौर फरमाना जरा तुम इस बात पर,
कि नजारों के लिए ही तो बनी है नजर।



(Author, my tukbandi)

Hindi Poem: सबसे सुरक्षित तो अब अपना ही घर लगता है...



सबसे सुरक्षित तो अब अपना  ही घर लगता है,
जरा सा बाहर  कदम रखने से भी डर  लगता है.

शहर की सारी  सड़कें पड़ी हैं वीरान यारों,
मुझे तो ये खंजरे-नफ़रत का असर लगता है.

मगर कुछ हाथ मौजूद हैं अभी भी प्यार लिए,
वो प्यार रेगिस्तान का एक सादाब शज़र लगता है.

बैठे  हैं दो चार लोग अभी भी चौपाल पर,
कितना हसीं-ओ-खुशनुमा ये मंजर लगता है.

चाहे दुनिया बनाए आसियाने कितने ही गजब के,
महल है हमारा तो वो जो आपको खंडहर लगता है.



(Author, my tukbandi)

Sunday, 21 July 2013

Hindi poem: स्याह जब सहरे-शहर लगेगी...



स्याह जब  सहरे-शहर लगेगी,
गाँव की तरफ ही नजर लगेगी।

हम भी लौट जाएंगे यहां से,
मुश्किल जब यहां बसर लगेगी।

क्यों जाता है वो जंगल के रास्ते,
क्या कोई खजाने की खबर लगेगी?

हमको तो सदा सूरज ने देखा है,
हमें भला किसकी नजर लगेगी।

यहां से चलते है 'राजू' कि यहां तो,
पहरेदारी हर पहर लगेगी।



(Author, my tukbandi)

Saturday, 20 July 2013

Hindi Poem: Arse Bad Wo Khwab Me Aaya | अरसे बाद वो ख्वाब में आया...



अरसे बाद वो ख्वाब में आया,
फिर  भी मगर नक़ाब में आया।

घर ही की बात थी मगर यारों,
कर्ज़  बहुत हिसाब में आया।

संभलकर  रहना  हसीनों  जरा,
गुलाब  अपने शबाब  में  आया।

खूबसूरत सा सवाल था मेरा,
गुस्सा मगर जवाब में आया।

आरजू  तेरी  भी पूरी हुई 'राजू',
नाम  तेरा भी इंकलाब में आया।