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Sunday, 21 July 2013

Hindi poem: स्याह जब सहरे-शहर लगेगी...



स्याह जब  सहरे-शहर लगेगी,
गाँव की तरफ ही नजर लगेगी।

हम भी लौट जाएंगे यहां से,
मुश्किल जब यहां बसर लगेगी।

क्यों जाता है वो जंगल के रास्ते,
क्या कोई खजाने की खबर लगेगी?

हमको तो सदा सूरज ने देखा है,
हमें भला किसकी नजर लगेगी।

यहां से चलते है 'राजू' कि यहां तो,
पहरेदारी हर पहर लगेगी।



(Author, my tukbandi)

Saturday, 20 July 2013

Hindi Poem: Arse Bad Wo Khwab Me Aaya | अरसे बाद वो ख्वाब में आया...



अरसे बाद वो ख्वाब में आया,
फिर  भी मगर नक़ाब में आया।

घर ही की बात थी मगर यारों,
कर्ज़  बहुत हिसाब में आया।

संभलकर  रहना  हसीनों  जरा,
गुलाब  अपने शबाब  में  आया।

खूबसूरत सा सवाल था मेरा,
गुस्सा मगर जवाब में आया।

आरजू  तेरी  भी पूरी हुई 'राजू',
नाम  तेरा भी इंकलाब में आया।