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Sunday, 21 July 2013

Hindi poem: स्याह जब सहरे-शहर लगेगी...



स्याह जब  सहरे-शहर लगेगी,
गाँव की तरफ ही नजर लगेगी।

हम भी लौट जाएंगे यहां से,
मुश्किल जब यहां बसर लगेगी।

क्यों जाता है वो जंगल के रास्ते,
क्या कोई खजाने की खबर लगेगी?

हमको तो सदा सूरज ने देखा है,
हमें भला किसकी नजर लगेगी।

यहां से चलते है 'राजू' कि यहां तो,
पहरेदारी हर पहर लगेगी।



(Author, my tukbandi)

2 comments:

  1. हम भी लौट जाएंगे यहाँ से,
    मुश्किल जब यहाँ बसर लगेगी।
    अर्ज किया है,
    लौट के यहाँ से जा न पाओगे
    मुश्किल ही अब आसान लगेगी।

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    Replies
    1. हा हा हा... बिल्कुल सही फरमाया आपने...

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