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Tuesday, 27 August 2013

Hindi Poem: दिल पर छाए तेरी यादों के बादल...



कसम से कर देंगे मुझको पागल,
दिल पर छाए तेरी यादों  के बादल।

दिल से निकलकर आँखों में आए,
और फिर रात भर बरसे बादल।

धुल गई स्याही मन के कागज से,
दिल की जमीन हुई दल-दल।

सुबह देखा धुंद छाई थी हर तरफ़,
ये क्या हुआ, कहां गए सब बादल।

मुझसे मिलकर तेरे पास गए होंगे,
चुराया तो होगा तेरी आंख से काजल।



(Author, my tukbandi)

Friday, 16 August 2013

Hindi Poem: अजीब है बातों के बाजार निकले...



अजीब है बातों के बाजार निकले,
कुछ लोग सच के खरीदार निकले।

आपको जानकर जान कहा है,
सितमगर निकले तो एतबार निकले।

दिल में दफ्न  है यादें उसकी,
कमबख्त आँखों में बार बार निकले।

निकला चाँद और हम निकले,
निकले और कई बार निकले।

आपको देने आये थे दिल की दौलत,
अफ़सोस कि आप भी जानकार निकले।



(Author, my tukbandi)

Monday, 12 August 2013

Hindi Poem: समन्दर को चाहे खामोश रहने दो...



समन्दर को चाहे खामोश रहने दो,
मगर मुझे कुछ कहना है कहने दो।

कोई नया रुख दो इन हवाओं को आज,
इन्हें आंधियों की तरह मत बहने दो।

मंजिल है दूर अभी चलना है बहुत,
मेरे पांव को कांटे की चुभन सहने दो।

मोहब्बत फैला दो यहाँ हर तरफ,
किसी आंख में आंसू  मत बहने दो।

चाहे कर दो हर राज़ को बेपर्दा यारों,
मगर इस 'राज़' को राज़ रहने दो।



(Author, my tukbandi)

Tuesday, 6 August 2013

Hindi Poem on Nature: सारी कुदरत का नशेमन है शज़र...



केवल परिंदों का बसेरा नहीं है ये शज़र,
सारी कुदरत का नशेमन है ये शज़र।

तुम दरख्तों को काट रहे हो ऐसा नहीं है,
जल्दी संभलो! खुद पर चला रहे हो खंजर।

सोचो अगर न मिलता माँ का आंचल,
वैसा ही होगा बिन पेड़ों का मंजर।

खेत-खलिहान, नदी-तालब, वन-उपवन,
नहीं होंगे ये नज़ारे जब न होंगे शज़र।

गौर फरमाना जरा तुम इस बात पर,
कि नजारों के लिए ही तो बनी है नजर।



(Author, my tukbandi)

Hindi Poem: सबसे सुरक्षित तो अब अपना ही घर लगता है...



सबसे सुरक्षित तो अब अपना  ही घर लगता है,
जरा सा बाहर  कदम रखने से भी डर  लगता है.

शहर की सारी  सड़कें पड़ी हैं वीरान यारों,
मुझे तो ये खंजरे-नफ़रत का असर लगता है.

मगर कुछ हाथ मौजूद हैं अभी भी प्यार लिए,
वो प्यार रेगिस्तान का एक सादाब शज़र लगता है.

बैठे  हैं दो चार लोग अभी भी चौपाल पर,
कितना हसीं-ओ-खुशनुमा ये मंजर लगता है.

चाहे दुनिया बनाए आसियाने कितने ही गजब के,
महल है हमारा तो वो जो आपको खंडहर लगता है.



(Author, my tukbandi)