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Sunday, 22 September 2013

Hindi Poem: रिश्ते बड़े नाज़ुक और कच्चे मिले...



रिश्ते बड़े नाज़ुक और कच्चे मिले,
मगर अच्छा हुआ जो अच्छे मिले।

या ईश्वर! ये नफ़रत क्यों है?
जब मोहब्बत के पैगाम अच्छे मिले।

अब सौदा करे भी तो किससे,
कमबख्त दुश्मन भी अच्छे मिले।

सुनते हैं कि जमाना ख़राब है,
मगर आप दोस्त अच्छे मिले।

अब तन्हाई से डरते नहीं राजू!
आँखों में ये मोती अच्छे मिले।



(Author, my tukbandi)

Tuesday, 17 September 2013

Hindi Poem: दिल मेरा खो जाना चाहता है...



दिल मेरा खो जाना चाहता है,
बस तेरा हो जाना चाहता है।

तेरे दिल की जमीन पर,
प्रेम-बीज बो जाना चाहता है।

क्यों आया तू कल ख्वाब में,
पागल आज रो जाना चाहता है।

तू जनता है मैं बुरा नहीं दोस्त!
फिर क्यों दूर हो जाना चाहता है।

सितारे उतर आये हैं आँखों में,
अब आसमान सो जाना चाहता है।


(Author, my tukbandi)

Sunday, 15 September 2013

For My Love | ये लो मेरा दिल रख लो...



मेरी उल्फत! मेरी जान!!

हाथ पकड़कर ले चलो,
कहीं ठोकर ना खा जाऊं,

और हाँ!

ये लो मेरा दिल रख लो,
कहीं खोकर ना आ जाऊं.



(Author, my tukbandi)

Saturday, 14 September 2013

Hindi Poem: गरम मेरे शहर की हवा कुछ नहीं...



गरम मेरे शहर की हवा कुछ नहीं,
आखिर इसे क्यों हुआ कुछ नहीं।

कुछ जानकर ही किसी ने कहा होगा,
हाथ उठे हैं मगर दुआ कुछ नहीं।

मैं तो पत्थर हूँ मुझे क्या होगा,
क्या तुमको भी हुआ कुछ नहीं ?

उसके हाथ की पीकर भी खड़ा हूँ मैं,
कम ये भी तो जलवा कुछ नहीं।

अब क्या बतलाएं इश्क़ में राजू,
सुना है दर्द से बड़ी दवा कुछ नहीं।



(Author, my tukbandi)

Thursday, 5 September 2013

Hindi Love Poem: मेरे दिल की पटरी...



मेरे दिल की पटरी
और
तेरी यादों की ट्रैन,

और फ़िर…

धड़क-धड़क...
धड़क-धड़क...



(Author, my tukbandi)

Wednesday, 4 September 2013

Hindi Poem by Rajendra Nehra: Sham Ke Dhalne Ka Intezar Kar Lete Hain | शाम के ढलने का इंतजार कर लेते हैं...



शाम के ढलने का इंतजार कर लेते हैं,
खुद से भी बातें दो चार कर लेते हैं।

जानते हैं ये ठीक नहीं मगर फिर भी,
गुजरे वक्त को याद कभी-कभार कर लेते हैं।

यूं तो सोचा नहीं करते कभी कुछ करते,
पर कभी बैठते हैं सोच विचार कर लेते हैं।

जाने क्यों जाता है वो हंगामों के बाजार,
हम तो खुद को दर किनार कर लेते हैं।

वो लाया फिजिक्स की किताब और बोला,
आ बैठ राजू! कुछ पाठ तैयार कर लेते हैं।


(Author, my tukbandi)