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Tuesday, 30 September 2014

Hindi Poem: मन हमारा पतंग समान...



मन हमारा पतंग समान!

इसे ढील दो,
दूर और बहुत दूर जाने दो,
कल्पना के आकाश में गोते खाने दो.

बस ये ध्यान रखो...

'डोर कहीं से टूट ना जाय,
चरखी हाथ से छूट ना जाय.'


(Author, my tukbandi)

Tuesday, 23 September 2014

Hindi Love Poem: तेरी याद के बाद...



ओ मेरी जान!

क्या कहूं आंखों का हाल,
तेरी याद के बाद.

कुछ ऐसा है...

जैसे पेड़ बरसते हैं,
बरसात के बाद.



(Author, my tukbandi)

Friday, 19 September 2014

Hindi Poem: बेखयाली में भी तेरा ख़याल है...



बेख़याली में भी तेरा ख़याल है,
फिर क्यों मग़र तुझे सवाल है.

वो मुंह उठाए देते हैं गालियां दोस्तों,
और हमारी दुआ पर बवाल है.

हमने कहा हमें भी कुछ बोलना हैं,
वो बोला- तेरी नानी का ननिहाल है?

झोंपड़ी देखकर अंदाजा ना लगाओ,
अंदर आके देखो हम मालामाल है.

ले आ राजू! कुछ सौदा कर आते हैं,
सुना है आज बाजार में उछाल है.



(Author, my tukbandi)