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Wednesday, 31 December 2014

Hindi Poem: मैं चल पड़ा आसमान को छूने...



ये किसकी आंखें ग़मगीन हो गई,
कि सारी हवाएं नमकीन हो गई.

ज़माना अमीर हुआ तो भी क्या हुआ,
जब दिलों की दुनिया दीन हो गई.

मैं चल पड़ा आसमान को छूने,
और मेरे साथ ये ज़मीन हो गई.

थोड़ी-थोड़ी पीते बहुत हुई दोस्त,
एक से दो हुई, अब तीन हो गई.

उन आंखों के आईने में देखा तो राजू,
ये सूरत और भी हसीन हो गई.



(Author, my tukbandi)

Monday, 22 December 2014

My Crazy Kavita: सर्दी आई और जुकाम आ गया...



आज फिर वही मुकाम आ गया,
सर्दी आई और जुकाम आ गया.

चन्दन का लेप होता था कल तक,
आज माथे पर झंडू बाम आ गया.

सुबह ठण्डा पानी देखकर राजू,
जुबान पर राम का नाम आ गया.
 
आज मेरी किस्मत क्या कहूं दोस्तों,
अच्छा स्वेटर सस्ते दाम आ गया.

Exams भी पास आ रहे हैं तो topper को एक warning तो दे ही दूं.....

अब संभलकर रहना topper के बच्चे,
नेहरा ने किताबों की धूल झाड़ ली है.



(Author, my tukbandi)

Monday, 8 December 2014

A Revolutionary Poem: आज ख़िलाफ़त के अल्फ़ाज़ उठे हैं...



जो ये कदम आज उठे हैं,
लगता है ज़मीर जाग उठे हैं.

जिनके हाथों में होता था खंजर,
आज वही खंजर के ख़िलाफ़ उठे हैं.

तूफ़ान भी झुका है उनके सामने,
करने सामना जो सब साथ उठे हैं.

आज वो मंजर नजर आ ही गया,
बिना जंजीरों के ये हाथ उठे हैं.

रहम की भीख मांगी थी आज तक,
आज ख़िलाफ़त के अल्फ़ाज़ उठे हैं.



(Author, my tukbandi)


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मगर मुझे कुछ कहना है कहने दो।