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Friday, 20 February 2015

A poem dedicated to my parents: उंगली पकड़ाकर चलाते मुझे...



उंगली पकड़ाकर चलाते मुझे,
जब कभी अंधेरे डराते मुझे.

ये है चांद और वो रहे सितारे,
हर बार प्यार से बतलाते मुझे.

मां  की गोद में सुकून मिलता है,
जब कोमल हाथ सहलाते मुझे.

बापू की आंखें डराती हैं मगर,
हाथ के तकिए पर सुलाते मुझे.

उनकी दुआओं से सलामत हैं ये,
मेरे नन्हें कदम समझाते मुझे.

सरल शब्दों में कहता हूं बात,
ग़ज़ल के सलीके नहीं आते मुझे.



(Author, my tukbandi)

Wednesday, 11 February 2015

My Love Poems

मोहब्बत से बढ़कर मर्ज़ ही क्या है,
मगर राजू! आजमाने में हर्ज़ ही क्या है.

My love poems: 

(For full poem just click on respective title)

1.जब तू मुस्कुराती है...


मेरे मन को बहुत भाती है,
जब तू मुस्कुराती है.

तेरे चेहरे का चांद
और
मेरे दिल का समन्दर,


ओ मेरी जान!

क्या कहूं आंखों का हाल,
तेरी याद के बाद.

आज उसकी आँखों में कोई सवाल नहीं था,
ख़ामोशी थी, कल वाला सा हाल नहीं था.

मैं ये कैसा गुनाह कर बैठा हूँ,
एक मासूम का दिल लेकर बैठा हूँ।

मेरी उल्फत! मेरी जान!!

हाथ पकड़कर ले चलो,
कहीं ठोकर ना खा जाऊं,

मेरे दिल की पटरी
और
तेरी यादों की ट्रैन,

8.दिल पर छाए तेरी यादों के बादल...

  कसम से कर देंगे मुझको पागल,
दिल पर छाए तेरी यादों  के बादल।

9.दिल मेरा खो जाना चाहता है...

  दिल मेरा खो जाना चाहता है,
बस तेरा हो जाना चाहता है।

क्या बताऊं तुम्हें रात की बात,
मेरे और चांद के साथ की बात.

अजी ये जो मोहब्बत सारी है,
हमारे तो दिल की बीमारी है.

अरसे बाद वो ख्वाब में आया,
फिर  भी मगर नक़ाब में आया।