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Monday, 25 May 2015

Hindi Poem: बरसो बादल मूसलाधार...



दहकती धरती करे पुकार,
बरसो बादल मूसलाधार.

खेत उजड़े, सूखे शज़र,
महकती बगिया बनी बंजर.

बिगड़ गया सब रूप सिंगार,
बरसो बादल मूसलाधार.

नीरस आंखें आसमान ताके,
मत जाओ तुम नजर चुराके.

अब उपवन में आये बहार,
बरसो बादल मूसलाधार.

गांव गांव और नगर नगर,
सब प्यासे हैं डगर डगर.

फिर से भर दो जल-भंडार,
बरसो बादल मूसलाधार.

शीतल सवेरा, सुरमई शाम,
रहा नहीं कुछ भी अभिराम.

सुन्दर हो जाये घर संसार,
बरसो बादल मूसलाधार.

गुम हुई चिड़िया की चहक,
जल गई वो सौंधी महक.

दे दो हरी चुनर उपहार,
बरसो बादल मूसलाधार.




*Image Source: Pixabay

Sunday, 17 May 2015

Hindi Poem: छलकता जाम रोज लेते हैं...



ना दिमाग पर बोझ लेते हैं,
ना दिल पर बोझ लेते हैं.

माथे का पसीना आंख का पानी,
हंसते-गाते पोंछ लेते हैं.

छोटी-छोटी बातों में भी दोस्त,
हम खुशियां खोज लेते हैं.

कुछ खट्टे-कड़वे लफ्ज़ों को,
दिल ही में दबोच लेते हैं.

देख दुनिया के चाल-चलन,
अच्छा-बुरा सब सोच लेते हैं.

जीवन की इस मदिरा का,
छलकता जाम रोज लेते हैं.



(Author, my tukbandi)

Saturday, 9 May 2015

A Poem For Her Smile: अच्छी लगती है तू मुस्कुराती हुई...



महकती हुई और महकाती हुई,
तू चलती है मादकता छलकाती हुई.

तब्बसुम के तराने लिए होठों पर,
बहारों को बुलाती है बहकाती हुई.

खूबसूरत सी दो झीलें हैं चांद पर,
सुन्दर सी मेरी तस्वीर बनाती हुई.

मेरी जान है तू मेरा जहान भी है,
हक़ जताए मेरी बातें इतराती हुई.

अब और  क्या कहूं...

हंसती खेलती खिलखिलाती हुई,
अच्छी लगती है तू मुस्कुराती हुई.



(Author, my tukbandi)