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Sunday, 17 May 2015

Hindi Poem: छलकता जाम रोज लेते हैं...



ना दिमाग पर बोझ लेते हैं,
ना दिल पर बोझ लेते हैं.

माथे का पसीना आंख का पानी,
हंसते-गाते पोंछ लेते हैं.

छोटी-छोटी बातों में भी दोस्त,
हम खुशियां खोज लेते हैं.

कुछ खट्टे-कड़वे लफ्ज़ों को,
दिल ही में दबोच लेते हैं.

देख दुनिया के चाल-चलन,
अच्छा-बुरा सब सोच लेते हैं.

जीवन की इस मदिरा का,
छलकता जाम रोज लेते हैं.



(Author, my tukbandi)

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