Saturday, 9 May 2015

A Poem For Her Smile: अच्छी लगती है तू मुस्कुराती हुई...



महकती हुई और महकाती हुई,
तू चलती है मादकता छलकाती हुई.

तब्बसुम के तराने लिए होठों पर,
बहारों को बुलाती है बहकाती हुई.

खूबसूरत सी दो झीलें हैं चांद पर,
सुन्दर सी मेरी तस्वीर बनाती हुई.

मेरी जान है तू मेरा जहान भी है,
हक़ जताए मेरी बातें इतराती हुई.

अब और  क्या कहूं...

हंसती खेलती खिलखिलाती हुई,
अच्छी लगती है तू मुस्कुराती हुई.



(Author, my tukbandi)

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