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Sunday, 27 September 2015

Happy Daughters Day Hindi Poem | नन्हीं कली...



वो घर, वो मोहल्ला, वो गली,
खिलने वाली थी जहां एक नन्हीं कली.
लेकिन दुर्भाग्य देखो उस घर का,
खिलने से पहले दे दी गई उसकी बलि.


कली खिलती तो फूल बनती,
महकता वह घर-उपवन.
मां को देती वह खुशियां हज़ार,
खुशहाल हो जाता उसका जीवन.

लेकिन दुर्भाग्य देखो उस मां का,
समझ ना पाई उसकी महत्ता.
वह थी अनमोल रत्न, चिराग़ बनती घर का,
पर कौन उसे यह समझाता?

कौन कहे, किस-किस से कहे,
यह है पूरे राष्ट्र की कमजोरी.
बेटे को पालते कान्हां की तरह,
बेटी को सुनाता नहीं कोई एक लोरी.

रूढ़ विचारों के आगे, मत झुको तुम आज,
उठो! बढ़ो! सृजित करो! एक सभ्य समाज.
तुम भी किसी बेटी से बने हो, समझो ये बात,
बेटी है भारत का ताज, बचा लो इसकी लाज.



(Author, my tukbandi)
www.mytukbandi.in


*Image Source: Pixabay

Tuesday, 22 September 2015

Hindi Poem: प्रेम-पथ पर गुलाब पड़ा है...



प्रेम-पथ पर गुलाब पड़ा है,
खुली आंख में ख्वाब पड़ा है.

चांद सा वो मुखड़ा दिखलाए,
दिल अपना बेताब पड़ा है.

चश्म-ए-यार में डूब जाओेगे,
बहुत बड़ा गिरदाब पड़ा है.

आओ मिलकर मौसम बनाएं,
कई दिनों से ख़राब पड़ा है.

जीवन-खाते की बड़ी बही में,
पाई-पाई का हिसाब पड़ा है.

आइए राजू! राम-राम करते हैं-

सुरमई शाम के सिरहाने पर,
नया-नया माहताब पड़ा है.



(Author, my tukbandi)
www.mytukbandi.in


*Image Source: Pixabay