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Tuesday, 22 December 2015

My Crazy Kavita: सर्दी से सावधान! ओढ़ लो टोपी, ढक लो कान...



सर्दी से सावधान!
ओढ़ लो टोपी, ढक लो कान,
गोंद के लड्डू बनवा लो,
चालू कर दो खान-पान.



रोटी खाओ बाजरे की,
धाप के पीओ राबड़ी,
सुबह-सुबह ये मंत्र बोलो-
"कर दे राम तावड़ी,
जी'व थारी डावड़ी."


सर्दी पड़ रही है तगड़ी,
निकाल लो चाहे अब गुदड़ी,
आओ ताऊ बांध के पगड़ी,
ताप लेते हैं थोड़ी सिगड़ी.

गिरते-गिरते आ ही गई,
भारी गिरावट पारे में,
धूप जम गई मुंडेर पर,
टपकती नहीं चौबारे में.

ठंडे पानी से नहाना नहीं,
सुन लो सब नर-नारी,
सूचना ये 'my tukbandi' द्वारा,
तन-हित में जारी.




(Author, my tukbandi)

Friday, 11 December 2015

A Lovely Hindi Poem: नज़र तो पड़ते ही चेहरे पर फिसल गई...



झूठ कहते हैं वो कि नज़र उनसें मिल गई,
अरे नज़र तो पड़ते ही चेहरे पर फिसल गई.

मासूम चेहरा, मादक नयन, मोहक मुस्कान,
सच कहते हैं हमारी तो जान निकल गई.

मदहोश हुआ दिल और लड़खड़ाती धड़कनें,
उनके दिल में दस्तक देने को मचल गई,

हमारे प्रेम-प्रस्ताव पर वो खामोश हो गए,
मगर धीरे-धीरे चुप्पी की रात ढल गई.

बातों-बातों में वो कदम मेरे साथ हो लिए,
उनकी एक हां से ऐ राजू! ज़िंदगी बदल गई.



(Author, my tukbandi)