Featured post

New address for my tukbandi

Saturday, 24 December 2016

Hindi Poem: रिश्तों की देखभाल...



रिश्तों की मैली चादर को
धो ना सको तो हुजूर!
कम से कम
उलटकर ही बिछा लो.


(Author, my tukbandi)


Friday, 9 December 2016

Hindi Poem: ख़्वाबों की खरीदारी...



सो जाता हूं घोड़े बेचकर,
ताकि जमा कर लूं
थोड़ी पूंजी
और
खरीद सकूं कुछ ख़्वाब।




A Poem Dedicated To Parents: उंगली पकड़ाकर चलाते मुझे...


Thursday, 24 November 2016

My Love Tukbandi: पचपन डिग्री का तेरा प्रेम...



मोम सा मेरा दिल
और
पचपन डिग्री का तेरा प्रेम,

और फिर...

"तेरे इश्क़ का अंदाज़ बदलता जाय,
और इधर मेरा दिल पिघलता जाय."



(Author, my tukbandi)

Thursday, 22 September 2016

Hindi Poem: The Ghazal


वैसे देखा जाए तो मेरी ये कविता कोई ग़ज़ल नहीं है, महज़ एक तुकबंदी है. फिर भी मैंने इसका शीर्षक 'The Ghazal' रखा है, और यही इसकी खासीयत है. तो पेश है 'The Ghazal'-


ना जाने उसकी आँखों में ऐसा क्या मिल गया,
हर किसी को अपनी ग़ज़ल का मतला मिल गया।

रात हुई और वो जगमगाती आंखें दीया बन गई,
अनजान किसी शायर के लिए काफ़िया बन गई।

किसी ने उन मतवाली आंखों को कह दिया सीप,
और शान से अपनी शायरी का कर लिया रदीफ़।

मासूमियत है, अदाएं हैं, हर मिसरे का नूर हैं वो,
जिसमें उनकी रौनक हो, ग़ज़ल बड़ी मशहूर है वो।

जब वो चले गए, हुश्न के बाज़ार में मंदी हो गई,
चलो मकता में राजू! अपनी भी तुकबंदी हो गई।

(Author, my tukbandi)

Wednesday, 17 August 2016

Raksha-bandhan Poetry:


मुझे भी उजालों पर हक़ दिया है,
बहना ने कलाई पर चांद रख दिया है.

-Rajendra Nehra
(Author, my tukbandi)

Saturday, 13 August 2016

Independence Day Hindi Poem: आंदोलन कभी ख़त्म नहीं होते...


उस समय की ज़रूरत थी-
"अंग्रेजों! भारत छोड़ो।"

और...

आज की ज़रूरत है-
"भारतीयों! भारत जोड़ो।"

ज़रूरतें बदलती जाती हैं,
पर आंदोलन कभी ख़त्म नहीं होते।

-Rajendra Nehra
(Author, my tukbandi)

Saturday, 16 July 2016

Hindi Poem: घड़ी दो घड़ी ठहर के जाइए...


घड़ी दो घड़ी ठहर के जाइए,
आज तो दिल को भर के जाइए।

अब अंधेरों से लड़ा नहीं जाता,
मेरी रातों में चांद कर के जाइए।

ये उदासियां नहीं जमती तुम पर,
मुस्कुराहटों से संवर के जाइए।

मुहब्ब्त में जो कभी किए नहीं,
उन वादों से ना मुकर के जाइए।

अजी नहीं जी पाओगे हमारे बगैर,
ऐसे खयालातों से डर के जाइए।

खोये हुए ख़्वाबों का कारवां मिलेगा,
दिल की गली से गुज़र के जाइए।

-Rajendra Nehra
(Author, my tukbandi)

Monday, 20 June 2016

A Speaking Poem: एक बोलती हुई कविता...



आसमान के कैनवास पर,
कुछ चित्र बनाए हैं,
बादलों ने.
कुछ श्वेत-श्याम चित्र,
रूप बदलते,
चलते फिरते चित्र.

जी करता है मैं भी लिख दूं,
इस अनन्त आसमान पर,
इन्हीं तस्वीरों के बीच,
एक कविता,
हां... एक कविता,
एक बोलती हुई कविता.

-Rajendra Nehra
(Author, my tukbandi)

Monday, 6 June 2016

New address for my tukbandi

Now 'my tukbandi' has its own web portal. Go and enjoy lovely poems here:




www.mytukbandi.in


-----------------------------------------------------

Monday, 7 March 2016

Hindi Poem: अजी ये जो मोहब्बत सारी है...

अजी ये जो मोहब्बत सारी है,

हमारे तो दिल की बीमारी है.



Sunday, 7 February 2016

Rose Day Special Love Poem: बिन कांटों के गुलाब हैं...



बिन कांटों के गुलाब हैं,
लब उसके लाजवाब हैं.

उन गुलाबी प्यालों में,
मीठी सी कोई शराब है.

चांदी जैसे मुखड़े पर,
दो हीरे बड़े नायाब हैं.

निशा बसे है ज़ुल्फ़ों में,
माथे पर माहताब है.

इश्क़ में डूबी नज्मों की,
अनपढ़ी सी किताब है.

ऐसे उसके हुस्न पर,
सादगी का हिज़ाब है.

दीद हुआ है जबसे राजू!
दिल की हालत ख़राब है.



(Author, my tukbandi)

Wednesday, 3 February 2016

Hindi Poem: अभी मस्त चांदनी है...



तन्हाइयों का दौर है,
खामोशियों का शोर है.

इम्तिहान चल रहे हैं,
पढाई पर जोर है.

तेरा वहम जायज है,
मेरे मन में चोर है.

मां की दुआएं साथ हैं,
उजाला चारों ओर है.

राजू डगर प्रेम की,
ना ओर है, ना छोर है.

अभी मस्त चांदनी है,
फिर सुहानी भोर है.

प्यार से पेश आइएगा,
चौधरी साब कठोर है.



(Author, my tukbandi)

Friday, 1 January 2016

A Sweet Hindi Love Poem for Her: जब आंखें तुझसे चार हुई...



जब आंखें तुझसे चार हुई,
मेरे मन को ख़ुशी अपार हुई.

चहक उठा अलसाया दिल,
धड़कने आर की पार हुई.

मोर पपीहा बुलबुल बोली,
और सावन की बौछार हुई.

पहली नज़र में दीवाना हुआ,
फिर दुनिया गुलज़ार हुई.

प्रेम की ग़ज़लें कहने लगी,
कलम बड़ी कलाकार हुई.

दिल के दरवाजे पर सनम,
तेरी यादें बंदनवार हुई.

सुन्दर तस्वीरें तेरी बनाए,
ये अंखियां भी फ़नकार हुई.

और...

तेरे इश्क़ का असर ये हुआ,
टूटे तारों में झनकार हुई.



(Author, my tukbandi)