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Thursday, 28 September 2017

Hindi Poem: Love without Sex | बिना सेक्स के इश्क़...



कोयल के बिना ये काला कानन,
और बिन कंठों के कोकिला।

सन्ध्या के बिना दिन की सुंदरता,
और बिन गोधूलि शाम सुहानी।

ख़ुदा के बिना ये कायनात,
और बिन आदम के ईश्वर।

मयखाने के बिना ये बस्ती,
और बिन शायर के मय-कदा।

गुलाब के बिना ये बाग पियारा,
और बिन जानम के गुले-गुलाब।

कुछ ऐसे ही है...

प्रेम के बिना ये क्षणिक जीवन,
और बिना सेक्स के इश्क़।

(Author, my tukbandi)
www.mytukbandi.in

*Image Source: Pexels

5 comments:

  1. A crux of life without love in simplified theology. Awesome

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    1. And I am happy that you understood the spirit of this poem. Thank you.

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  2. Waa what spirit in poem feel great ful

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    1. शुक्रिया दोस्त!

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  3. Waa what spirit in poem feel great ful

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